डॉक्टर छमिया लोमड़ी
जुम्बा में कोई इंसान नहीं रहते थे, बल्कि जुम्बा एक जानवरों से सम्पन्न गाँव था.
आस पास के सभी गावों में जुम्बा सबसे प्रसिद्ध गाँव था. इसक कारण यह था कि – जुम्बा में हॉस्पिटल, स्कूल और खेल का एक मैदान भी था. इसीलिए जुम्बा के लोग आस पास के गाँवो से ज्यादा पढ़े लिखे होते थे.
दूर दराज से सभी जंगली बच्चे पढने के लिए यहीं पर आते थे. अगर कीसी को कोई बीमारी हो जाती तो इलाज के लिए सीधे छमिया ताई के पास आते. इसीलिए जुम्बा गाँव का दूर दूर तक बोल बाला था.
छमिया ताई एक बूढी लोमड़ी हैं, जो सभी मरीजो का इलाज पांच रूपये में करती है. छमिया यहाँ की एकमात्र डॉक्टर हैं, दरअसल छमिया चाहती थी कि उसका बेटा भी गाँव का डॉक्टर बने लेकिन वह पढाई करके कही शहर में जाकर बस गया.
वैसे तो जुम्बा में बारिश बहुत कम होती है लेकिन बारिश के मौसम पानी के कारण यहाँ पर निफा नाम की बीमारी फ़ैल जाती हैं. निफा बीमारी यहाँ के जानवरों के लिए एक महामारी से कम नहीं थी.
अबकी बार निफा का प्रकोप कुछ ज्यादा ही था. छमिया लोमड़ी ने लैब में टेस्ट कर बताया कि निफा बूढ़े लोगो को सबसे ज्यादा खतरा देगा, उनकी जान भी ले सकता हैं.
छमिया ने गाँव के सरपंच भालू से बात कर सभी जगह इस तरह के पोस्टर लगवा दिए.
बीमारी से बचना,
तो घर में ही रहना.
अगर जीवन को हैं बचाना,
तो दो चार सप्ताह मत नहाना.
जानवरों को इतना कहने के बाद भी वे बारिश का आनंद लेते रहते और बीमार पड़ने पर छमिया के सामने जाकर खड़े हो जाते. छमिया बेचारी अपना काम समझकर उनका इलाज कर देती थी.
जानवर लापरवाही करते गए और निफा बीमारी और अधिक फैलती गयी. मरीजो का इलाज करते करते छमिया ताई को भी निफा हो गया. छमिया ताई ने मरीज की तरह बिस्तर पकड़ लिया. अब पूरे गाँव में इलाज करने वाला दूसरा कोई नहीं था.
बीमारी अधिक फैलती गयी और लोग को मरने की संख्या भी काफी बढ़ चुकी थी.
छमिया को इस बात का बहुत दुःख था कि अब वह किसी का इलाज नहीं कर सकती हैं. लेकिन छमिया से रहा न गया और उसने वैक्सीन बनाने का फैला किया.
अगले दिन छमिया ने सरपंच भालू से कहकर एक मीटिंग बुलवाई.
छमिया ने कहा कि – मैं बहुत जल्द इस बीमारी की वैक्सीन बनाने वाली हूँ. लेकिन मुझको इसके परिक्षण के लिए तीन लोगो की जरुरत पड़ेगी. क्या आप में से कोई तीन लोग तैयार हैं? और याद रखे कि इसमें आपकी जान को खतरा भी हो सकता हैं. लेकिन अगर एक बार हमारा टेस्ट सफल हो गया तो फिर हमारे लाखों जानवरों को इस बीमारी से बचाया जा सकता हैं.
सभी जानवर एक दुसरे का मुंह देखने लगे? और कोई राजी नहीं हुआ.
छमिया को बूरा लगा लेकिन उसने ठान लिया कि वह लोगो को इस तरह मरने नहीं देगी. छमिया ने तय किया कि सबसे पहले वह खुद पर ही इस वैक्सीन को आजमाएगी.
छमिया गुप्त तरीके से पांच दिनों तक जंगल में घुमती रही और जड़ी बूटियों को इकट्ठी करती रही. जड़ी बूटियों को लेकर वह हॉस्पिटल में आई और उसने एक “दमदार वैक्सीन” का निर्माण किया.
दरअसल दमदार को लेने के बाद कोई भी जानवर चार घंटो के लिए गहरी नींद में सो जाता हैं. अगर चार घंटो के बाद नहीं उठा तो यह टेस्ट फ़ैल हो जायेगा.
छमिया ने अपने बेटे और गाँव को एक पत्र लिखा और कहा कि – अगर दवाई लेने के बाद मैं नहीं उठी तो….’सभी गाँव वाले मुझे माफ़ कर देना, मैं आपको इस बीमारी से नहीं बचा पायी. मेरे बेटे से कहना कि – सच्ची भलाई में किसी प्रकार का लालच नहीं देखा जाता हैं, अगर तुम गाँव में रहकर लोगो कि सेवा करोगे तो तुम्हे इन गरीब लोगों की सेवा का पुण्य मिलेगा.’
छमिया लोमड़ी ने ये लिखकर खुद को दमदार का डोज लगा दिया. और एक कपडा ओढ़कर सो गयी. चार घंटो के बाद छमिया नहीं उठी.
किसी ने आवाज़ लगाई और गाँव वाले हॉस्पिटल के बाहर इक्कठे हो गए. सरपंच ने सभी को पत्र सुनाया, सभी गाँव वाले रोने लगे और छमिया को याद करने लगे.
सरपंच ने तुरंत छमिया के बेटे को बुलाया. आधे घंटे में उसका बेटा वहां आ गया. लैटर पढ़कर वह भी रोने लगा. उसने वादा किया कि अब वह कभी गाँव को छोड़कर नहीं जायेगा.
गाँव के सभी जानवर डॉ छमिया की अंतिम यात्रा की तयारी करने लगे. दूर दूर सभी जानवर फुल माला लेकर वहां आये.
जैसे ही छमिया का अंतिम संस्कार करने के लिए लोग उसको उठाने वाले थे कि वह खुद ही उठ गयी.
सभी लोग हैरान रह गये और दूर भागने लगे. छमिया ने कहा – भागो मत, दर असल दमदार वैक्सीन बुढो को छ घंटे के लिए सुलाती हैं, मैं ये लिखना भूल गयी थी.
अब मैं ठीक हूँ और ये वैक्सीन भी कारगर हैं अब गाँव में कोई नहीं मरेगा.
इसके बाद छमिया सभी गाँव वालो को दमदार का डोज लगा देती हैं और लाखों लोगों को इस बीमारी से बचा लेती हैं.
मेडिकल क्षेत्र में इतना बड़ा योगदान करने के लिए कांगो के शेर ने उसको ‘कांगोरत्न’ से सम्मानित किया, जो कि वहां का सबसे बड़ा पुरस्कार हैं.
कहानी का नैतिक -: तकदीर भी उनका साथ देती हैं जो स्वयं कभी हार नहीं मानते हैं.